अक्सर एक छुट्टू सी हंसी नाभि से बाहर को फुदकती आती है और हम दोनों के होंठों पर
नाचने लगती है !कभी कभी इक कोमल अंगूठा मेरी दीवारें खटखटाता है और मैं मुस्कुराकर बुदबुदाती हूँ " थोडा रुको अभी ..और थोड़े बड़े हो जाओ "
जब रातों को मेरा सारा बदन सोता है तो मेरी रूह जागकर एक नन्हे बदन की रखवाली करती है !मेरे सीने के बाईं ओर की टिकटिक मुझे अब सुनाई नहीं पड़ती ... मेरी सम्पूर्ण देह ही एक ह्रदय में तब्दील हो चुकी है !
मैं मेरी माँ को याद कराती हूँ " माँ याद करो ना , क्या तुम्हे भी ऐसा होता था ?" माँ ज़ोरों से हंसती है , माँ की स्मृति से एक पल को भी मेरा आना विस्मृत नहीं हुआ है , माँ को उस एहसास को जीने के लिए बस मुझे बाहों में भर लेना होता है ! माँ आँखें बंद कर पूरी पहर उस पच्चीस साल पुरानी जादुई घटना के बारे में बात कर सकती है !
ओह ... पूरा ब्रम्हांड मेरे अन्दर गोल गोल चक्कर काटता है ! जिस दिन मेरी आत्मा ने सबसे मीठा चुम्बन पाया था उस दिन मैं जान गयी थी कि दो सुर्ख पंखुरियां नाज़ुक होंठों में बदल गयी हैं !
इन दिनों "बड़ा नटखट है ये कृष्ण कन्हैया " की धुन सितार पर सुनते हुए चेहरा आनंद के आंसुओं से भीग उठता है और छातियाँ एक नन्हे मुंह के स्पर्श को व्याकुल हो उठती हैं !
मेरे स्वप्न तुतलाने लगे हैं ,मैं दुनिया का सारा ज्ञान परे रख नन्ही ठोकरों की भाषा सीखने लगी हूँ ! मेरी उंगलियाँ सितार के तारों पर फिसलना भूल खरगोश की डिजाइन वाले नन्हे जुराब बुनना सीख गयी हैं !
मेरी देह के ताल में एक गुलाबी कमल खिल रहा है !
......................................( एक होने वाली माँ को सोचते , महसूस करते और जीते हुए )
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तुम्हारे लिए
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मैं उसकी हंसी से ज्यादा उसके गाल पर पड़े डिम्पल को पसंद करता हूँ । हर सुबह
थोड़े वक्फे मैं वहां ठहरना चाहता हूँ । हंसी उसे फबती है जैसे व्हाइट रंग ।
हाँ व्...
6 years ago