Thursday, April 3, 2014

प्रेम कायनात का सबसे प्यारा जादू है

वो पगली सिर्फ हंसना जानती थी ! बचपन से ही मैले कपड़ों में पूरे मोहल्ले में भटकती फिरती और जिसे देखती , देखकर " खी खी " करके हंस पड़ती और फिर बस हंसती ही रहती देर तक ! लोग हिकारत से देखते और गुज़र जाते ! कई लोगों को उसकी हंसी देखकर रश्क तक होने लगा ! बुद्धिमान उसकी हंसी को उसका सुख समझते और अपने जीवन को कोसते !

उसे रुलाने के प्रयत्न किये जाने लगे ! बच्चे जूठे आम फेंक कर मारते , कोई मनचला कंधे पर हाथ मारकर निकल जाता , एक औरत ने उसका एकमात्र शॉल नज़र बचाकर उठा लिया और नाले में डाल दिया दिया , जिस घर के सामने देहरी पर बैठ जाती , गालियां सनसनाती उसके कानों के आर पार हो जातीं ! वो बस हंस पड़ती .... उसकी हंसी में एक नामालूम सी उद्देश्यता थी ! कई बार पेट पकड़ पकड़ कर हंसती।,मगर नामुराद की आँखों में कभी हंसी के मारे भी आंसू नहीं आये ! उसे रुलाना मोहल्ले के एक एक व्यक्ति का उद्देश्य बन गया था !

एक दिन एक अजनबी आया और उसके सामने आकर खड़ा हो गया ! पगली ठठाकर हंस पड़ी , हंसती गयी बस हंसती गयी ! वो भी उसके सामने चुप्प खड़ा रहा बस खड़ा रहा ! पगली हंसी के मारे दोहरी हो हो गयी ! पहर बीतने को आयी ! मोहल्ले के लोग तमाशा देखने इकट्ठे हो गए ! ऐसा लगने लगा पगली हंस हंस कर ही प्राण त्याग देगी ! तभी यकायक अजनबी ने आगे बढ़कर पगली को सीने से लगा लिया ! पगली हंसती हुई छूटने की कोशिश करने लगी , इस कोशिश में उसकी अजीब अजीब भंगिमाएं देख मोहल्ला हंसी के मारे लोटपोट होने लगा ! लेकिन वो उसे कसकर सीने से लगाए रहा , जब पगली थोड़ी बेदम हो उठी तब अजनबी ने उसका चेहरा अपनी हथेलियों में भरकर प्यार से ऊपर उठाया और उसके सर पर धीरे धीरे हाथ फेरने लगा ! पगली अब चुपचाप उसके सीने से लगी थी ! अब वो खामोश थी ! एकाएक उसकी आँखों में एक काला बादल उतर आया और कुछ पलों में बरसात शुरू हो गयी ! पगली रो रही थी .... बिलख बिलख कर रो रही थी ! अजनबी उसे मजबूती से बाहों में भरकर खड़ा था ! एक के बाद एक तूफ़ान पगली की आँखों से गुज़रकर फ़िज़ाओं में घुलते जा रहे थे ! पूरा मोहल्ला सकपकाया हुआ अपनी आँखें पोंछ रहा था ! दो पहर और बीते ! अँधेरा होते ही केवल दो लोग वहाँ खड़े थे ! एक अजनबी की बाहों में घिरी एक रोती हुई पगली!

उस दिन रात भर तूफानी बारिश हुई ! सुबह होते ही मौसम साफ़ हुआ था और पगली की आँखों ने अजनबी के काँधे पर एक शुक्रिया रखा था !

वो इक तूफ़ान की रात थी , इक बरसात की रात थी , इक आंसुओं की रात थी ………… वो इक प्रेम की रात थी !

Sunday, October 13, 2013

पप्पू भये उदास

पप्पू आज सुबह से भयंकर वाला उदास है ! वो होता यूं है कि पप्पू नित्य की तरह मुंह में सीटी चाल में उछाल वाले भाव के साथ जागते हैं ! उठके बालों को झटका वटका देते हैं ...आईने में बाल संवारते हैं, तभी मकानमालिक चले आते हैं किराया मांगने ! जाने क्या हुआ मकानमालिक के जाने के बाद कि पप्पू उखड जाते हैं  ! वैसे पप्पू की जगह कोई भी होता तो उखड़कर न जाने कहाँ जा पड़ता , पप्पू तो फिर भी उखड़कर घर में ही डले हैं ! कोई तरीका है कि सुबह सुबह चले आये किराया मांगने ! तकाजा करने का भी एक वक्त होता है ...ये थोड़े कि हर कभी मुंह उठाये चले आओ! अगर सात महीने का भी किराया है तो भी हम तो कहते हैं कि  उसका भी एक वक्त है, कायदा है बल्कि बाकायदा संहिता है !

पप्पू का मूड इस कदर खराब हुआ कि उन्होंने मुट्ठियाँ भींच लीं ...दांत पीसे , भुजाएं फड़कायीं और गुर्र गुर्र किट किट की आवाजें निकालीं ! बगावती तेवरों का ये आलम था कि उन्होंने उस दिन मंजन कुल्ला भी नहीं किया , पहला विद्रोह था ये नियम कायदों से ! पप्पू हुंकार भरते कमरे के इस छोर से उस छोर तक घूमे , पप्पू ने ज़मीन पर इस कदर लोट लगाईं कि सामने नाली में मौज मानते, खेलते कूदते  सूअर भी डिप्रेशन में आ गये ! ! उन्होंने तय किया कि पप्पू से लोट लगाने की नयी तकनीक सीखेंगे ! पप्पू फर्श पर इस  धमक के साथ कूदे कि चूहों ने डर  के मारे हाय एलर्ट ज़ारी कर दिया ! एक घंटे तक पप्पू कमरे भर में तांडव करते रहे .. ..शंकर जी जिस चट्टान पर बैठे धूनी रमाये थे , अचानक वो चट्टान कांपने लगी ! थोड़ी देर में लस्त पस्त होकर पप्पू ज़मीन पर बैठ गए ! तब शंकर जी ने राहत की सांस ली !

पप्पू एंग्री यंग मैन बनकर एक घंटे में बोर हो गए ...उन्होंने मन ही मन बिग बी को सलाम ठोका फिर चुपचाप बिस्तर पर जाकर चित्त लेट गए ! गुस्सा धीरे धीरे उदासी में परिवर्तित होने लगा ! गुस्सा ज्यादा देर टिकाने लायक ऊर्जा का अभाव था पप्पू की देह में , इसलिए देह के लिए भी उदासी का वरण करना ज्यादा सुविधाजनक था !

उदास होकर पप्पू पहले धीमे धीमे क़दमों से ठोड़ी पर हाथ धरे हुए कमरे में मंडराते रहे फिर खिड़की से टेका लगाकर खड़े हो गए ! शून्य में घूरने की कोशिश की मगर शून्य कहीं नज़र नहीं आया ...पप्पू और उदास हो गए कि जीवन में पहली बार शून्य में देखने की ज़रुरत पड़ी और साला पूरे मोहल्ले में कहीं शून्य नहीं है ! पप्पू ने कागज़ पर एक शून्य बनाया और एक मिनिट तक उसे घूरा ! फिर पप्पू ने सोचा " पता नहीं लोग शून्य में क्यों घूरते हैं ?"

 पप्पू फिर बिस्तर पर लेट गए ... पप्पू ने मोबाइल पर दर्द भरे नगमे का एल्बम खोला  और एक दर्द से सना गाना सिलेक्ट किया " मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोये . बड़ी चोट खायी जवानी पे रोये " पप्पू ने गाने को अपने साथ जोड़कर जस्टिफाय किया " मुहब्बत केवल लड़की से ही थोड़े होती है , मैंने भी  जिंदगी से मुहब्बत की है , मैं जवान हूँ और चोट खाया हुआ हूँ ! हाँ हाँ ये गाना मेरे लिए ही बना है " पप्पू से दो बार से ज्यादा गाना नहीं झिल सका ! अगला गाना आया "हा बेवफा हरगिज़ न थे पर हम वफ़ा कर न सके " साला ये भी मुहब्बत का गाना ! पप्पू ने फिर जस्टिफाय किया " ठीक तो है ... मैं तो मकानमालिक का किराया चुकाना चाहता हूँ पर कंगाली आड़े आ रही है , मैं भी मजबूरी में वफादार नहीं हो पा रहा हूँ ! हाँ हाँ , ये गाना बिलकुल मेरे लिए ही है ! पप्पू को अब हर गाने में खुद को ढूँढने में आनंद आने लगा ! अब के गाना आया " दम मारो दम , मिट जाए ग़म " पप्पू उछल पड़ा " ये हुई न बात ..उदासी सम्प्रदाय के लिए प्रेरक गीत तो यही है " पप्पू ने गुटका पाउच उठाया और फांक लिया ! अगला गाना था " पप्पू कांट डांस साला .... " पप्पू उदासी के मारे गदगद हो गए ! क्या बात है ... ऐसे दुखी मन से कोई कैसे नाच सकता है ? पप्पू ने फिर तो डिस्को से लेकर आयटम सौंग्स तक कई गाने सुने और दर्द को जीते चले गए ! 

दो घंटे लगातार गीत सुनने के बाद पप्पू फिर एक बार बोर हुए ! उदासी के बादल थे कि छांटने का नाम नहीं ले रहे थे ! पप्पू की भूख भी मर गयी थी ...फिर भी पप्पू ने सोचा शायद अच्छे भोजन से फील गुड हारमोन सीक्रेट होता हो ..तो चलो बिना मन के ही कुछ खा लिया जाए ! पप्पू झट अपनी फटफटिया उठाकर चटोरी गली पहुँच गए ! दो प्लेट आलू टिक्की , बीस पानी पूरी और एक प्लेट रबड़ी खाने के बाद पप्पू ने दबाकर एक कलकतिया पान खाया ! घर आकर फील गुड हारमोन का लेटकर इंतज़ार करने लगे पर हारमोन का " हा" भी नहीं निकला ! पप्पू कचकचाये  ... " बिना मन और भूख के खाकर आया पर ये कम्बखत फील गुड हारमोन भी जाने कहाँ मर गया है  !"

अभी तो पूरी शाम बाकी थी ! पप्पू के दिमाग में एक बार आया कि कहीं चलकर पैसों का इंतजाम कर लिया जाए फिर पप्पू ने सोचा इस ग़म की बेला में कहीं जाना उचित नहीं है ! पप्पू फिर बिस्तर पे पसर गए !फिर पप्पू को ध्यान आया कि कुछ हंसी ठठ्ठा हो ले तो शायद बेचैन रूह को कुछ करार आये !पप्पू ने तीन घंटे मिस्टर बीन देखा .. बिना मन के पेट पकड़ पकड़ कर हँसे ! पर तीन घंटे बाद फिर वही उदासी का आलम ! हाय पप्पू ...अब क्या करे?

पप्पू ने सोचा ..अब सो लिया जाये , नींद तो आने से रही पर कोशिश तो की जा सकती है ! पप्पू चादर तानकर बिस्तर पर लमलेट हो गए ! फिर पप्पू ने भारी मन से खर्राटे मारे , भारी मन से कैटरीना के सपने देखे , रात में दो बार सू सू करने उठे और आकर फिर छूटा हुआ सपना कंटिन्यु किया ! अगले दिन पप्पू जब उठे तो मन हल्का हो चूका था ! एक पहाड़ सा दिन पप्पू ने घोर उदासी में काटा था ! सुबह देवदास ने पप्पू की बालकनी पर बीयर वर्षा की !

पप्पू ने एक फुल दिन उदास रहकर उन लोगों के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा जड़ दिया है जो कहते रहते हैं " ये पप्पू साला कभी उदास नहीं होता "  

Wednesday, September 25, 2013

पप्पू महिमा

ये भी भला कोई बात हुई ... परीक्षा हॉल में गए ! बुद्ध जैसी गंभीर शकल बनाकर कुर्सी पर बैठ गए और पेपर मिलने के इंतज़ार में चेहरे पर अभूतपूर्व शान्ति ओढ़कर बैठ गए ! पेपर मिलने पर भी चेहरे के भावों में कोई परिवर्तन नहीं .. दिल में कोई खलबली नहीं .. मुंह नहीं सूखता ! तीन घंटे सरवायकल के मरीज़ टाइप एक दिशा में सर झुकाए कॉपी रंगते रहे ! बीच में न पानी , न सू सू , न गुटका ..न बगल वाले का कोई असेसमेंट ! हश... ये भी कोई तरीका हुआ परीक्षा देने का !

पेपर देना सीखना है तो हमारे पप्पू से सीखिए ! ठीक पंद्रह मिनिट पहले हॉल में पहुँचते हैं ! सबसे हाय हैलो करते हुए अपना रोल नंबर ढूंढते हुए अपनी टेबल पर पहुँचते हैं ! एडमिट कार्ड से रोल नंबर देखकर टेबल पर पड़े रोल नंबर को मैच करने के बाद संतुष्ट होकर कुर्सी पर बैठते हैं ! पड़ोसी की तैयारी का जायजा लेते हैं ... उसे घबराता देख सांत्वना देते हैं " इत्ते सरल पेपर में क्या घबराना बे .. मैं तो रात को पिक्चर देखकर आया और बस उठकर चला ही आ रहा हूँ !" इत्ता बोलकर मुंह छिपाकर पप्पू खुद को ही आँख मार देते हैं ! अभी दस मिनिट बाकी हैं ! पप्पू ने अब अपना एक पाउच निकाला है जिसमे तीन चार तरह के पेन , पेन्सिल, रबड़ , शार्पनर आदि परीक्षोपयोगी स्टफ़ है ! सारे पेन छिड़क छिड़क कर देख रहे हैं पप्पू , पेन्सिल की नोक हथेली में चुभा चुभा कर देख रहे हैं पप्पू , मेज पर पसीना पोंछने के लिए रूमाल बिछा रहे हैं पप्पू !घडी उतार कर मेज के दायें कोने पर रख ली है पप्पू ने ! पप्पू ने दो बार मास्साब से पक्का कर लिया है कि पेपर तीन ही घंटे का है ना ? पप्पू को देखकर स्वर्ग लोक के देवता गदगद हो रहे हैं !

आखिर पेपर मिल जाता है ! पप्पू पेपर पढने से पहले दूसरे लोगों के चेहरे के भाव देखते हैं ताकि पेपर खोलने से पहले ही अंदाजा लग जाए कि पेपर बनाने वाले ने क्या कसम खाके पेपर बनाया है ! सबके पेपर पढ़ चुकने के बाद पप्पू आराम से पेपर खोलते हैं ! पेपर पढ़ते हुए पप्पू कभी मुस्कुराते हैं , कभी थूक गुटकते हैं , कभी दोनों मुट्ठियाँ हवा में लहरा कर उत्साहित होते हैं ! पप्पू अब बारी बारी से सारे पेन एक बार फिर चैक करते हैं , रूमाल से हथेलियों का पसीना पोंछते हैं और पानी मांगते हैं ! मास्साब पानी पिलवाते हैं ! फिर पप्पू सोचते हैं कि एक बार सू सू का कार्य भी निपटा ही दिया जाए तो फिर बढ़िया रिदम बनेगी कॉपी लिखने की ! मास्साब बुरे मन से आज्ञा देते हैं ! पप्पू टहलते टहलते बाथरूम जाते हैं ! फारिग होकर टहलते टहलते वापस आते हैं ! अब तक पंद्रह मिनिट निकल चुके हैं ! अब पप्पू लिखने बैठते हैं ! पप्पू अचानक देश के वित्त मंत्री की तरह नज़र आने लगे हैं ! चिंता सवार हो गयी दिखती है ! पप्पू ने पड़ोसी की तरफ एक नज़र डाली है और अपनी कापी अपने हाथ से छुपा ली है !

यहाँ ये बात गौर करने की है कि पप्पू को दस प्रश्नों में से मात्र दो ही आते हैं आधे अधूरे से! पप्पू पूरी गति से पेन चलाते हैं ... राणा सांगा देख ले तो उसे अपनी तलवार की गति पर क्षोभ पैदा हो जाए! अभी पढ़ाकू बच्चे अपनी आधी कॉपी भर पाए हैं , इतने में पप्पू की आवाज़ गूंजती है " सर सप्लीमेंट्री कॉपी " ! पढ़ाकुओं का पसीना छूट पड़ता है! सब पप्पू को देखते हैं और अपनी बची हुई आधी कॉपी देखकर थूक गटकते हैं! पप्पू किसी को नहीं देखते ...फिर से भिड़ जाते हैं अपना पेन भांजने में! पप्पू दिमाग पर पूरा जोर डालकर उन दो प्रश्नों के उत्तर याद करने की कोशिश करते हैं ...फिर दिमाग के जाने किस खंडू खांचे से निकाल कर ज्ञान की पंजीरी कॉपी पर बिखरा देते हैं!

एक पढ़ाकू बाकी बचे दो पन्ने लिखकर अपनी पहली सप्लीमेंट्री लेने का मन बना रहा है! इतने में फिर से पप्पू की आवाज़ गूंजती है " सर सप्लीमेंट्री " और पढ़ाकुओं के सीने पर गाज बनकर गिरती है! पप्पू इधर उधर की गपोड़पंती ढपोला रायटिंग में लिखना प्रारम्भ करते हैं! सर भी उत्सुक होकर पप्पू के पास आकर खड़े हो जाते हैं और उसकी कॉपी देखने की कोशिश करते हैं! पप्पू हाथ से कॉपी ढक लेते हैं !सर खिसिया कर अपना रास्ता नापते हैं! इस प्रकार पप्पू पूरी पांच सप्लीमेंट्री भरते हैं! पप्पू की कॉपी विविधताओं का अनोखा संगम है हमारे देश की तरह ! इसमें गीत , चुटकुले, डायलौग , प्रार्थनाएं और काल्पनिक कथाओं के साथ जीवन का गहन दर्शन भी है !पप्पू का जीवन दर्शन इन दो पंक्तियों में समझा जा सकता है
" गाय हमारी माता है
हमको कुछ नहीं आता है "
यही दर्शन पप्पू ने कॉपी के आखिरी पन्ने पर चिपका दिया है !


बाहर निकलकर सबने पप्पू को घेर रखा है और पूछ रहे हैं " कैसा गया पेपर? " पप्पू बाल झटकते हुए कहते हैं " यार इससे सरल पेपर तो मैंने जिंदगी में नहीं देखा ! टाइम कम पड़ गया नहीं तो दो कॉपी और लगतीं मुझे " इतना बोलकर पप्पू बढ़ लेते हैं!

मनोरंजन के एकमात्र साधन अप्सराओं के नृत्य से बुरी तरह उकताए हुए स्वर्ग के देवता खुश होकर फूल बरसाते हैं ... पप्पू सर पर गिरे फूल को जेब में रख लेते हैं और शाम को गुल्ली को भेंट कर देते हैं और प्रसन्न भाव से अगले पेपर के लिए शर्ट पेंट प्रेस करने लगते हैं !