Wednesday, November 18, 2015

और कमला मर गयी


कमला के आदमी ने कमला के गाल सुजाये
खींचा पटका और घर से निकाल दिया 
इसने देखा , उसने देखा , सबने देखा
मैंने भी देखा 

सबके कानों में एक साथ गांधीजी चिल्लाये 
" बुरा मत देखो "
हम सब अपनी आँखों पर हाथ रखकर घर लौट गए 

कमला रोती रही रातभर गली के कुत्तों के साथ
मोटी मोटी गालियां बकती रही अपने घर की देहरी के बाहर 
इसने , उसने , सबने सुनीं 
मैंने भी सुनीं 

गांधी जी फिर हमारे कानों में फुसफुसाए
" बुरा मत सुनो "
हम सब ने खिड़कियाँ बंद कीं और सो गए 

कमला फिर कभी नहीं दिखी 
दो दिन बाद एक अनजान औरत की मौत पुलिस फ़ाइल में दर्ज़ थी 
शिनाख्त पर कोई कमला निकली 

पुलिस मोहल्ले भर में पूछती फिरी 
" क्या हुआ था ? कमला के पति का चलन कैसा है ?"
मूर्ख हवलदार .. क्या जाने गांधी की शिक्षा 

हम किसी के लिए बुरा नहीं बोलते ... गांधी बुरा मान जाते हैं 
हमने अपने मुंह पर हाथ रख लिया 

जांच में कमला की मौत नामालूम वजहों से आत्महत्या निकली 

हमने अगले दिन गांधी प्रतिमा पर फूल चढ़ाये 
ऐनक और चरखे को कवर फ़ोटू बनाया 
तीन बंदरों को शुक्रिया कहा 
इस तरह हमने दो अक्टूबर मनाया

Thursday, September 17, 2015

विदा - 2

सबसे उदास और बदरंग मौसमों में मैंने चुने 

सबसे चटक रंग अपनी कुर्ती के लिए 
दुपट्टे में लगवाई गोटा किनारी और
आँखों में भर लिए नीलकंठ और नौरंगे के चमकीले रंग

एक ज़र्द और धूसर साँझ जब सीने से लिपट लिपट जाती तो
मैं भागकर सामने जनरल स्टोर जाती,
झटपट ले आती रंगबिरंगी जेम्स की गोलियां और
मेरी वाली ऑरेन्ज को उस सलेटी शाम के माथे पर सजा देती 
फिर पहनती अपनी ऑलिव ग्रीन फूलों वाली घेरदार स्कर्ट 
और मोज़िटो हाथ में लिये देर रात तक सुनती रहती
रेस्त्रां में गिटार थामे गाते उस नवयुवक को

जब रातें नाग बन आँखों पर कुंडली मारकर बैठ जातीं 
मैं मुल्तवी कर देती सोना और रात गुज़ार देती
चर्च में मिस्टर बीन के बराबर वाली कुर्सी पर बैठे हुए
नागों के पास नहीं है अच्छा हास्य बोध
आखिर थक कर वे वापस लौट ही जाया करते

पीली पड़ चुकी डायरी में कितनी बार रखे मैंने ताज़े फूल 
सूखी शाखों को हरियाया ओ ' हेनरी तरीके से 
लगभग ठहर चुके वक्त में मैं चली पागलों की तरह
ठहरने को खारिज करते हुए,
बंद पड़ी घड़ियों पर दिन में सिर्फ दो बार नज़र डाली
वक्त सही न था पर मैंने जब देखा सही देखा

मेरे भीतर का शहर जब जब उजड़ा 
मैं उन सुनसान सड़कों पर भागी पायलें पहनकर
घुंघरुओं के शोर से कुचला अकेलेपन की कातर चीखों को

जब माथे पर गहरी नींद सोया एक भूला बिसरा चुम्बन अंगड़ाई लेता
जब उन गुज़रे सालों की कोई बेरहम स्मृति किवाड़ खटखटाती
जब स्वप्न शत्रु की तरह पेश आने लगते 
तब मैं उन प्रेमिकाओं के बारे में सोचती जिन्हें जन्मों जन्मों तक श्राप मिला है विरह में होने का 
प्रेम में जीती मरतीं उन औरतों की गाढ़ी पीड़ा को 
मरहम बनाकर लेप दिया अपने एक नन्हे से दुःख पर

इस तरह मैंने सबसे बुरे दिनों में भी जुटाया
अपने हिस्से की ख़ुशी का एक एक मॉलिक्यूल

सिर्फ तुम जानते हो कि ये सारी मशक्कत थी
महज एक वादे को निभाने के लिए वरना 
उदास औंधे मुंह लेटकर रोते रहना कितना आसान था

और देखो .. मैं तुम्हे तब तक क्रूर मानती रही 
जब तक जान नहीं गयी कि 
दरअसल तुम मुझे क्या सिखाना चाहते थे

अब मैं सुख का बंदोबस्त नहीं करती 
सुख को चुनती हूँ ...

बात बस कुल इतनी सी कि 
विदा मुलाकातों की डोर का टूटना और 
दो आत्माओं के बीच स्मृतियों की कभी न खुलने वाली एक पक्की गाँठ का लगना है....

और अब कौन जानता है यह मुझसे बेहतर कि 
हर विदा ब्रेकअप नहीं होती....

Thursday, August 20, 2015

ये होती है बारिश

.
बारिश का होना केवल काले बादलों से बूंदों का गिरना थोड़े ही है 
बूँदें बारिश नहीं होतीं
वे तो बारिश लाती हैं

बताऊँ ? क्या होते हैं बारिश के मायने ...
धड़कनों का मोर बन जाना है बारिश
बदन का मुस्कराहट बन जाना है बारिश
आँखों का जुगनू बन जाना है बारिश 
बाहों का झप्पी बन जाना है बारिश

सड़कों का संतूर बन जाना है बारिश 
पहाड़ों को कहवे की तलब उठना है बारिश 
नदियों की गुल्लक भर जाना है बारिश 
जंगलों का किलकारी बन जाना है बारिश

रांझों का जोगी हो जाना है बारिश
हीरों का नटनी हो जाना है बारिश 
खुदा के पेहरन का कच्चा हरा रंग छूट जाना है बारिश
रातों का झींगुर हो जाना है बारिश

धरती का खुशबू हो जाना है बारिश 
सूरज का एक झपकी मार लेना है बारिश 
रेनकोट के भीतर तरबतर हो जाना है बारिश 
यादों की इक सूखी पत्ती का हरिया जाना है बारिश

आसमान का टिपटिप हो जाना है बारिश 
शहरों का छप छप हो जाना है बारिश 
मौसम का रिमझिम हो जाना है बारिश 
रागों का घन घन हो जाना है बारिश

नज्मों के चेहरों पर बूंदों का झिलमिलाना है बारिश 
सीले ख़्वाबों का सुलग उठना है बारिश
मन का सबसे कच्चा कोना रिसने लगना है बारिश 
बूढ़ी पृथ्वी के जोड़ों में इक कसक है बारिश

पुराने एल्बम पलटना है बारिश 
ड्राफ्ट्स में सहेजा एक ख़त दसियों बार पढना है बारिश 
गुलज़ार , पंचम और ब्लैक कॉफ़ी है बारिश 
छतरी ठेले से टिका भुट्टे खाना है बारिश और

तुम्हारा हौले से मेरा माथा चूम लेना है बारिश .....