कल रात मेरे और चाँद के बीच
गुफ्तगू हुई...
देर तक मारते रहे गप्पें हम
मैंने कहा चाँद से,
बड़ा परेशान हूँ मैं
नहीं पाता इस दुनिया में खुद को फिट
दुनिया का कद ज्यादा बढ़ गया है
और मैं रह गया हूँ
एकदम बौना और तन्हा सा....
चाँद जोर से हंसने लगा
और बोला....भाई मेरे
तेरी मेरी मुश्किल तो साझी है
तारे भी नहीं करते मुझे अपने खेल में शामिल
मेरे इत्ते बड़े कद के कारण
मैं भी हूँ अनफिट
इस तारों भरे आसमान में....
तुम्हारे लिए
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मैं उसकी हंसी से ज्यादा उसके गाल पर पड़े डिम्पल को पसंद करता हूँ । हर सुबह
थोड़े वक्फे मैं वहां ठहरना चाहता हूँ । हंसी उसे फबती है जैसे व्हाइट रंग ।
हाँ व्...
6 years ago