Sunday, June 8, 2008

वो खामोश बैठी लड़की

अभी अनुराग जी की पोस्ट पढी...लास्ट की लाइन्स "दर्द है कि कम्बख्त ख़त्म होता नही..........रूह को चैन मिलता नही" पढ़कर बहुत कुछ याद आ गया! कभी कभी कुछ लम्हे जेहन पर ऐसे चस्पा हो जाते हैं कि गाहे बगाहे याद आ जाते हैं! आज ही किसी अखबार में एक छोटी बच्ची के बलात्कार कि खबर पढी,मन कसैला हो गया!और अचानक वो याद आ गयी...

वो चौदह साल की ही तो थी जब इस दर्दनाक हादसे की शिकार हुई! सात साल पहले एक देहात के थाने में थाना प्रभारी की ट्रेनिंग ले रही थी! गंभीर अपराध पलट रही थी..नज़र पड़ी , स्टाफ ने बताया पास के ही एक छोटे से गाँव की लड़की है उसके २० साल के पडोसी लड़के ने रेप किया! लड़का अरेस्ट हुआ? मैंने पूछा ! मैं आगे का पेज पलटने लगी तभी हवलदार की बात सुन के बुरी तरह चौंक गयी..." साहब..वो लड़की अब गर्भवती है" !कुछ बहुत ही अजीब सी फीलिंग उठी मन में..रहा नहीं गया! मुझे ले चलोगे उसके गाँव? क्यों नहीं...अभी चलिए!

लगभग ५ किलो मीटर दूर था उसका गाँव! पहुंची..लड़की के घर पहुंचे! माँ बाहर ही बैठी थी! मैंने नज़र घुमाई..बमुश्किल २०-२५ टपरे बने हुए थे !सारे के सारे अनपढ़ और हद से ज्यादा गरीब! माँ ने बताया कि सातवां महीना चल रहा है! इतने में वो भी बाहर निकल कर आयी! सांवली, दुबली पतली सी लड़की! उसकी माँ ने बैठने का इशारा किया..चुपचाप जमीन पर बैठ गयी! मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या बात करूं उससे!" इससे तो पैदा ही नहीं होती तो अच्छा था.." माँ लड़की को देखते हुए बोली! वो बिलकुल चुपचाप थी..मैंने माँ को डांटा" इसमें इसकी क्या गलती है...उसे क्यों कोसती हो" इसे किसी डॉक्टर को दिखाया? माँ ने क्रतग्य भाव से मेरे साथ आये हवलदार कि ओर देखकर बोला " इन हैड साब ने बहुत मदद की हमारी...डॉक्टर के पास ले जाना, दवाई दिलवाना सब करवा देते हैं! बड़ा अच्छा लगा सुनकर!इसके पहले तक मेरे मन में पुलिस कि छवि नकारात्मक ही ज्यादा थी! खैर...मिलकर वापस आ गयी और दूसरे कामों में लग गयी!

दो महीने बाद उसे अस्पताल में भरती कराया गया! लड़की का माँ के अलावा कोई नहीं था...लेकिन थाने के सारे स्टाफ की सुहानुभूति थी..दौड़ दौड़कर दवाई लाना..डॉक्टर को बुलाना..सब मेरे सिपाहियों ने ही किया! रात को उसने एक लड़की को जन्म दिया! हम सब पहुंचे उसे देखने...बड़ी खूबसूरत प्यारी सी बच्ची थी! घर आकर सोयी...सुबह चार बजे फोन की घंटी से नींद खुली...." उसने अपनी पैदा हुई बच्ची का गला घोंट कर मार दिया" कानों पर विश्वास नहीं हुआ...भागकर अस्पताल पहुंची! सचमुच उसने अपनी कुछ घंटों की बेटी का गला घोंट दिया था...नवजात बच्ची निर्जीव पड़ी हुई थी!वो अब भी चुपचाप अपने पलंग पर बैठी थी! उसकी माँ उसे गालियाँ देती हुई रोये जा रही थी! मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था...क्या करूं? क्यों किया तुमने ऐसा? मैंने उससे पूछा ! " मैं क्या करती इसका...?" पहली बार वो कुछ बोली ! क्या करती मतलब...?मैं बुरी तरह खीजकर बोली!
"अम्मा ही तो जब से कह रही है...तेरी लड़की है अब तू ही संभालना, आप बताओ मैं कैसे सम्भालू इसे...मुझे नहीं चाहिए" उसकी आँखों न आंसू हैं न चेहरे पर कोई पश्चाताप! डिलेवरी के बाद उसकी हालत भी कोई ठीक नहीं थी..ऊपर से दिसम्बर की ठंड! उसके ऊपर अपनी ही बेटी के कत्ल का मुकदमा कायम हो गया! अगले घंटे में वो अस्पताल से निकलकर थाने के हवालात में आ गयी! कोई प्रतिरोध नहीं...एकदम खामोश बैठ गयी फिर से!पता नहीं क्या चल रहा था उसके मन में....उस बेचारी बिना पढी लड़की को ये भी बोध नहीं था की उसने कोई अपराध कर दिया है! उसे अभी तक ये समझ नहीं आ रहा था...की आखिर उससे ऐसी क्या गलती हो गयी...उसकी लड़की, उसे नहीं चाहिए उसने मार दी! मैं उसे कानून नहीं समझा सकती थी! हवालात में बैठी बुरी तरह से कांप रही थी....इस वक्त थाने के स्टाफ ने जो किया मेरे मन में सभी के लिए श्रद्धा भर गयी...मैंने उसके लिए स्वेटर मंगाया...एक सिपाही अपने घर से वो लड्डू बनवा लाया जो डिलेवरी के बाद दिए जाते हैं...दूसरे सिपाही की पत्नी उसके साथ बैठी रही..जब तक वो सो नहीं गयी! अगले २४ घंटे वो थाने पर रही...उसके बाद कोर्ट पेश की गयी ..जहाँ से उसे सुधार गृह भेज दिया गया!

कत्ल का मुकदमा चला उस पर...शायद उम्र को देखते हुए सज़ा में कुछ कमी हो जाये मगर उसे बरी कोई नहीं कर सकता!पता नहीं..केस ख़त्म हो गया या अब तक चल रहा है?पता नहीं उसे कितने साल की सजा हुई? अब तक तो वो बालिग हो गयी होगी और सुधार गृह से निकलकर जेल पहुँच गयी होगी! हत्यारी माँ का लेबल भी उस पर लग गया होगा!

मैं अक्सर सोचती हूँ...कानून की नज़र में वो गुनाहगार है पर क्या सचमुच वो दोषी है?

जब सोचती हूँ उसके बारे में तो मुझे " gods must be crazy" film का वो सीन याद आ जाता है जिसमे कालाहारी का एक बुश्मैन हिरन मार देता है...जब उसे कोर्ट ले जाया जाता है...तो उसे सजा मिलती है लेकिन वह अंत तक नहीं समझ पाता की उसकी गलती क्या है? जिस परिवेश में वह रहता था वहा कोई कानून नहीं था! शायद उस लड़की के लिए भी बिल्ली मारना और इंसान को मारना एक जैसा ही रहा होगा! आज फिर से वो खामोश बैठी लड़की बहुत याद आ रही है!

Thursday, June 5, 2008

कुछ कच्चे पक्के से लम्हे



कुछ कच्चे पक्के से लम्हे
आज फिर वक्त की डाल से तोड़े
धोकर पोंछकर रख दिए हैं एक डलिया में
तुम्हारी नज़र कर रही हूँ....

चख के देख लेना
मीठे लम्हे तुम रख लेना
कड़वे मुझे वापस कर देना ,और
हो सके तो किसी एक को
अपने दांतों से आधा काट लेना
आधा मुझे दे देना
मिल बाँट कर खा लेंगे

जैसे पहले सेब खाया करते थे....

Monday, June 2, 2008

कैसी कैसी उत्तर पुस्तिकाएं...


आज यूं ही भाई बहनों के साथ बैठे बैठे गपिया रहे थे..कई मजेदार टॉपिक निकले उनमे से एक था जब परीक्षा में प्रश्न का उत्तर नहीं आता हो और कॉपी कोरी नहीं छोड़नी हो तो क्या क्या लिखा जा सकता है!मेरे पास भी अथाह तो नहीं पर थोडा बहुत अनुभव है पढाने का..एम. ए. करते करते एक स्कूल में एक साल पढाया...एम. ए करने के बाद कॉलेज में कुछ महीने संविदा पर पढाया और अब पढाती तो नहीं पर कॉपी जांचने का महा बोरिंग काम जरूर करना पड़ता है ..जब हर साल कॉन्स्टेबल भर्ती होती है और उसमे उत्तर पुस्तिकाएं चैक करनी पड़ती हैं! ये मजेदार उत्तर उस बोरिंग कार्य को रोचक बनाने में सहायक होते हैं...इस कथा में मैं बचपन से लेकर अभी तक के उन प्रश्न उत्तरों को शामिल कर रही हूँ जिन्हें मैंने स्वयम देखा है...सुना सुनाया कुछ भी नहीं है...

प्रश्न-१ ईसा मसीह ने अपनी अन्तिम घड़ियों में क्या प्रार्थना की?
उत्तर- ईसा मसीह ने प्रार्थना की कि मेरी सारी घडियाँ मेरे शिष्यों में बाँट दी जाएं और मेरी पसंद की घडी मेरे साथ दफना दी जाए!

प्रश्न-२ दांतों तले उंगली दबाने का अर्थ बताते हुए वाक्य में प्रयोग करो!
उत्तर- "इतना कठिन पेपर देखकर हमने दांतों तले ऊँगली दबा ली l

प्रश्न-३ जंतुओं और पौधों में पांच अंतर बताइये?
उत्तर- (बीच में लाइन खींचकर) पौधे हरे होते हैं, जंतु रंग बिरंगे होते हैं!
पौधों में रक्त ऊपर से नीचे बहता है, जंतुओं में रक्त नीचे से ऊपर बहता है!
पौधे हुआ हुआ नहीं करते, जंतु हुआ हुआ करते हैं! (हुआ हुआ अर्थात उनकी आवाज़,शायद उसके गाँव के आसपास भेडिये बोलते रहे होंगे )पौधे चंचल नहीं होते, जंतु चंचल होते हैं!
पांचवा भी याद किया था...भूल गया!

प्रश्न-४ कारगिल समस्या क्या है?
उत्तर- कारगिल में बहुत ठंड पड़ती है! सिपाहियों को टेंट में रहना पड़ता है और शौच के लिए बाहर लोटा लेकर जाना पड़ता है ठंड के कारण पानी जम जाता है और सिपाहियों को समस्या होती है!

प्रश्न-५ पानीपत का द्वितीय युद्ध पर निबंध लिखो?
पानीपत का द्वितीय युद्ध अकबर और हेमू के बीच हुआ था..अकबर के पास तलवार और हेमू के पास कटार थी!अकबर ने तलवार लहराई, हेमू ने कटार घुमाई!दोनों आपस में टकराई...खन्न की आवाज़ हुई!खन खना खन ...की आवाजें मैदान में गूंजने लगीं! कभी अकबर आगे तो कभी हेमू आगे!थोडी थोडी देर में दोनों सुस्ता कर पानी वगेरह पी लेते थे!फिर लड़ाई मार काट शुरू हो जाती थी!घोडे पे चढ़ चढ़ के लड़ते थे दोनों......इसी प्रकार से पूरे तीन पेज का उत्तर बना!

प्रश्न-६ मलेरिया पर टीप लिखो?
उत्तर- मलेरिया वलेरिया कुछ नहीं होता ,ये सब मन का वहम है! ( डॉकटर्स कृपया ध्यान से पढें इसे :)

प्रश्न-८ देश से गरीबी हटाने के उपाय बताइये?
उत्तर- हर गरीब को अमेरिका भेज कर वहाँ के हर आदमी को उन्हें रखने का कानून बनाना चाहिए!अमेरिका अमीर देश है उनका एक नागरिक अगर एक गरीब को पाल लेगा तो हमारे देश से गरीबी कम हो जायेगी! ( क्या बात कही...एक साथ गरीबी और जन संख्या दोनों कम)
ques-9 write an essay on cow?
ans- 1) cow is our mother.
2- it has no khaki bag.
3-it has no cycle.
4-it has eat ghaas.( बेचारे बच्चे ने याद तो पोस्टमैन का किया था..ये परीक्षा लेने वाले सच्ची में बहुत बुरे होते हैं)
प्रश्न-१० proton पर टीप लिखिए?
उत्तर- proton की खोज मोसले ने की थी! यह दूध में पाया जाता है!इसे पीने से ताकत मिलती है! हड्डी मजबूत होती है! इसके साथ neutron और electron भी पाए जाते हैं!

ये तो हैं कुछ अजीबो गरीब उत्तरों के नमूने इसके अलावा कुछ पैदाइशी सिफारिशी होते हैं...कैसी कैसी सिफारिशें लिखी होती हैं कॉपियों पर ...एक नज़र-
१- मैं बहुत गरीब हूँ...माँ की मौत हो गयी इसलिए पढ़ नहीं पायी!कृपया इस बार पास कर दीजिये!
२- मेरे ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी है!पास नहीं हुआ तो नौकरी नहीं मिलेगी! पास कर दो!
३- आपको भगवान् की कसम है..पास कर दो न!
४- मेरा पता और टेलीफोन नंबर नीचे लिखा है...जो कोई मुझे भरती कर लेगा उसे ५०,००० रुपये का इनाम दूंगा!
५- १०० का नोट नत्थी कर रहा हूँ...कृपया पास कर दें!

आप सभी ने भी अवश्य ऐसी रोचक कॉपियाँ देखी होंगी या लिखी भी होंगी!मैंने भी लिखी हैं...वो अगली बार के लिए छोड़ देती हूँ!आप भी जोड़ दीजिये इसमें अपना अनुभव...इसी ८ तारीख को मुझे फिर से कॉपी जांचने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है!शेष अगली किसी पोस्ट में........