अभी कुछ दिन पहले की बात है थाने में एक क्रिमिनल आया! रिवाज है की थाने में आने वाले हर अपराधी का फोटो खींचा जाता है व एल्बम में नत्थी कर दिया जा
ता है! इन महाशय को भी फोटो खिंचवाने के लिए खडा किया गया!एक कॉन्स्टेबल हाथ में कैमरा लेकर खडा हुआ चोर महाशय को भी सामने खडा किया गया! जैसे ही कॉन्स्टेबल क्लिक करने को हुआ चोर मुस्कुरा दिया! मुस्कुराती हुई फोटो कैमरे में कैद हो गयी!" अबे..हँस मत , सीधा खडा रह! बिना दांत दिखाए" कॉन्स्टेबल ने घुड़का!
चोर ने हाँ में सर हिलाया ! फिर से कॉन्स्टेबल ने कैमरा उठाया क्लिक किया पर चोर की बत्तीसी इस बार भी फोटो की शोभा बढा रही थी!
" साले ...तेरी शादी के लिए फोटो खींच रहा हूँ क्या? बिना हँसे खडा रह चुपचाप नहीं तो दूंगा एक कनपटी के नीचे , हँसना भूल जाएगा!" कॉन्स्टेबल को इस बार जोर से गुस्सा आया!
साहब ...अब के नहीं हसूंगा " चोर ने उसे आश्वस्त किया! मैं और टी.आई बैठे बैठे फोटो खींचने का इंतज़ार कर रहे थे! फिर से चोर खडा हुआ...कॉन्स्टेबल ने कैमरा उठाया , और ये क्या.....चोर खुद को रोकते रोकते फिर से मुस्कुरा दिया! कॉन्स्टेबल आगे बढा....एक चांटा रसीद किया उसके गाल पर!
" साले...तेरी प्रॉब्लम क्या है? क्यों इतना खुश हो रहा है...दांत तोड़ दूंगा सामने के!" कॉन्स्टेबल बुरी तरह गुर्राया!
" सौरी साब....वो क्या है की जैसे ही फोटो खिंचने को होता है , मुझे अपने आप हंसी आ जाती है"" क्यों आ जाती है तेरेको हंसी....किसी फिलिम का हीरो है क्या तू "
" पक्का साब...इस बार नहीं हसूंगा, मारना मत" चोर ने वादा किया
ठीक है...आखिरी मौका दे रहा हूँ...अब के हंसा तो इत्ती ठुकाई करूँगा की ...." कॉन्स्टेबल ने वाक्य अधुरा छोड़ कर कैमरा थाम लिया! फिर से फोटो खींचने की कवायद शुरू हुई.....मुझे भी उत्सुकता थी...अब क्या होगा? तीन ,दो, एक....क्लिक और अगले ही पल एक झन्नाटेदार चांटा फिर से चोर के गाल पर पड़ा और कुछ उच्च कोटि की गालियाँ भी हवा में तैर गयी! इतने में मेरे मोबाइल पर मैसेज टोन आई और मैसेज था " smile is the language of love...smile is way to get success.smile improves your personality....keep smiling even u are going thru your worst phase. never leave smiling" मुझे हंसी आ गयी...किसी ने दो घंटे पहले मैसेज किया था जो अब मेरे पास पहुँच रहा था....वाह रे ऊपर वाले तेरा सेंस ऑफ़ ह्यूमर भी कमाल का है! क्या सही टाइमिंग है! एक बार फिर मैंने मैसेज पढ़ा ..फिर चोर को देखा जो चांटा खाकर गाल पे हाथ धरे खडा था! खैर दो तीन रीटेक के बाद सीन ओके हो ही गया!
हमें याद है ऐसे ही कई बार गलत जगह, गलत टाइम पर इस कमबख्त हंसी ने हमें भी बहुत हलकान किया है! एक बार हमारे मकानमालिक अंकल सीढियों से नीचे गिर गए...आंटी जी भी हंसमुख टाइप की थीं! उनके मुंह से निकला..." अरे देखो तो सही...ये कैसे गोल गोल लुढ़क कर गिर गए" आंटी भी हंसी...हम और जोर से हँसे! आंटी बड़ी थीं उनसे किसी ने कुछ न कहा...पर हमें डांटने में किसी ने कोई कसर न छोड़ी! पहले मम्मी हर साल गर्मियों की छुट्टियों में नानी के गाँव ले जाती थीं! जब छुट्टियां बिताने के बाद हम विदा होते थे तो सीढियों से नीचे उतरने तक सब हँस रहे होते थे लेकिन जैसे ही बस स्टैंड की तरफ चलना शुरू होते वैसे ही मम्मी , मौसी और नानी चिपट चिपट कर रोने लगतीं! बिना किसी पूर्व भूमिका के इस तरह सुबक सुबक कर रोना देखकर हम खी खी कर के हँस देते! मम्मी मौसी के गले लगे लगे ही हमें घूरतीं....रोने तब भी जारी रहता! एक पल को सहम कर हम चुप हो जाते...फिर दुसरे ही पल मुंह फेर कर आवाज़ दबाकर हम सब भाई बहन हंसते! जब हंसी आती है तो किसी के रोके नहीं रूकती...बेचारा चोर भी क्या करता! खैर अब वक्त की मांग है की कई जगह पर हंसी कंट्रोल करना बहुत जरुरी हो जाता है...अब इसमें थोडी बहुत निपुणता हासिल कर ली है! कम से कम इतना तो हो ही गया है कि उस वक्त कैसे भी रोक लेते हैं बाद में भले ही अकेले ही हँस लें! चलते चलते ईश्वर से एक प्रार्थना...." हे प्रभु, कभी किसी को यूं नीचा न दिखाना
गलत टाइम पर हंसने से हमेशा बचाना"!

