Tuesday, December 2, 2014

तोते

चारदीवारी एक आज़ाद कैद की माफिक है 
या यूं कहिये दस बाय दस का तोते का पिंजरा 
तोते खुश हैं , सेहतमंद हैं और वफादार भी 
तोतों के पंख सलामत भी हैं 
और जानदार भी

तोते अपनी किस्मत सराहते हैं 
दूसरे तोतों के दो बालिश्त बराबर पिंजरे देख

बस ..उनकी उड़ने की इच्छा का हरण किया गया है 
बेहद चतुराई से

उड़ने वाले तोतों को देख जो कभी लालच आये 
पिंजरे के तोतों में तो ,
वे तमाम कहानियां सुनाते हैं कि 
कैसे शिकारी बाज़ नोच डालते हैं उन्हें 
और यह भी कि तोते सिर्फ दहलीज के भीतर महफूज़ हैं

चारदीवारी आज़ादी के मानी नहीं समझाती 
तोतों को सिखाये जाने वाले तमाम लफ़्ज़ों में गायब है 
" आसमान " और "उड़ान"

उन्हें यकीन है 
तोतों की अगली पीढियों से नहीं छुपाना पड़ेगा "आसमान " को 
ये शब्द खुद ब खुद गायब हो जाएगा उनके दिमागों से 
इंसानी पूंछ की तरह

तब उन्हें रटाया जाएगा "आसमान "
और इसका उच्चारण करते हुए वे देखेंगे 
एक बड़ी खाली जगह 
जैसे हम देखते हैं अन्तरिक्ष 
जहां जाने की ज़रुरत नहीं
सिर्फ ज्ञान ही काफी है

हर " रिओ " को नहीं मिलते ये बताने वाले कि 
" रिओ " तुम उड़ सकते हो

Sunday, November 30, 2014

प्रेम एक पालतू बिल्ली है

हवा में उछाले गए चुम्बन,
किसी को ज़ेहन में रखकर लिखी और 
फिर फाड़ डाली गयी नज्में
कभी न कभी पते पर ज़रूर पहुँचते हैं.......

आंसुओं और नमक में क्या रिश्ता है
सिवाय इसके कि 
दोनों जिंदगी में स्वाद बढाते हैं
पर आंसू कभी चुटकी भर नहीं मिलते

आखें किराए का इक मकान हैं 
और ह्रदय आंसुओं का पुरखों वाला घर 
पीड़ा प्रेम का स्थायी भाव है 


प्रेम एक पालतू बिल्ली है
और दिल उसका मालिक
मालिक के चेहरे पर नाखूनों के अनगिन निशान हैं 
बिल्ली मरती नहीं ... मालिक उसे भगाता नहीं 

 

जब कोई लम्हा ठिठक जाता है तो 
इक दास्तान में बदल जाता है 
रुके हुए लम्हे कभी मरते नहीं
तुम्हारे इंतज़ार में रुका लम्हा आज भी धड़कता  है 


एक चील भी अपने घोंसले वाली डाली पर 
किसी दूसरी चील को बैठने नहीं देती
मैं तो फिर भी इंसान हूँ....

Monday, November 24, 2014

गर्विता


आपकी इज्ज़त आपके कर्मों में बसी 

आपने दान किया ..आपकी इज़्ज़त बढ़ी 
आपने जग जीता ..आपकी इज़्ज़त बढ़ी 
आपने आविष्कार किये ..आपकी इज़्ज़त बढ़ी 

फिर मेरी इज़्ज़त आपने मेरी नाभि के नीचे क्यों बसाई ?

मेरे जग जीतने से मेरी इज़्ज़त नहीं बढ़ी 
अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने से मुझे मान नहीं मिला 
पर मेरे एक रात प्रेम करने से मेरी इज़्ज़त ख़त्म हो गयी 
मुझ पर एक शैतान का हमला मेरी इज़्ज़त लूट गया 

मैं हैरत में हूँ 
मेरे एक ज़रूरी अंग को आपने कैसे मेरी इज्ज़त का निर्णायक बनाया ?
किसने आपको मेरी आबरू का ठेकेदार बनाया ?

अगर बनाया तो बनाया 
आप बुद्धिहीन नहीं ..बहुत शातिर थे
मैं जान और समझ गयी हूँ आपके इस शातिराना खेल को
मुझे साज़िशन गुलाम बनाया गया है 

अब मैं अपनी इज़्ज़त को अपनी जाँघों के बीच से निकालकर फेंकती हूँ 
मेरा कौमार्य मेरी आज़ादी है ..न कि मेरी आबरू 

मुझ पर एक हमला मुझे शर्मिन्दा नहीं करेगा अब 
ना ही मेरी इज़्ज़त छीन सकेगा 
मैं उठकर आपकी आँखों में डालकर ऑंखें 
हिसाब लूंगी अपने ऊपर हुए हमले का 

शर्मिन्दा होगा ये समाज और ये सरकार 
शर्मिंदा होंगे आप 
मैं गर्विता हूँ और रहूंगी 
हज़ार बार हुए हमलों के बावजूद