Friday, March 11, 2016

वाट्सएपिया रोमांस

वो लड़का इस ग्रुप में बहुत पहले से था ! लड़की ने महीने भर पहले ही ज्वाइन किया ! लड़का और लड़की अलग अलग प्रदेश के ! दोनों ने न कभी एक दूसरे का शहर देखा और न कभी एक दूसरे को ! फोटो में भी नहीं .. देखते भी कैसे ? लड़की ने अपनी प्रोफाइल पिक में एक म्याऊँ लगा रखी थी और लड़के ने कोई छोटी बच्ची !

बस एक दूसरे की पोस्ट पढ़कर दोनों एक दूसरे की सूरत अपने दिल में बनाया करते ! लड़का जब ग़ालिब की कोई ग़ज़ल लिखता, लड़की मीर को कोट करती ! लड़का हेमंत कुमार का गाना सुनवाता ,जवाब में लड़की तलत को पेश करती !

एक दिन लड़के ने मनोहरश्याम जोशी की "कसप" से डी डी के पत्र का कोई अंश ग्रुप में डाला और लड़की ने झट से बेबी के अल्हड़ और कुमाउनी भाषा के पत्र का एक अंश जवाब में डाल दिया ! हांलाकि दोनों के बीच कभी हाय हेलो भी नहीं हुई थी लेकिन लड़के को लगा मानो वो खुद डी डी हो और बेबी ने उसे ख़त का जवाब दिया हो ! लड़के ने ठीक सोचा था ! लड़की जवाब देते हुए बेबी ही बन गयी थी !

लड़के को कुछ सूझा नहीं उसने न जाने किस झोंक में तीन डॉट " ... "बनाकर छोड़ दिए ! लड़की के दिल की धडकनें तेज़ हो गयीं ! उसकी तरफ से भी ठीक वही तीन डॉट " ... " आये मगर ग्रुप में नहीं !
लड़की सयानी थी ! लड़की ने स्टेटस अपडेट किया
" बड़े अच्छे लगते हैं । ये धरती,ये नदिया ,ये रैना और ... "

लड़का मुस्कुरा उठा !
अलबत्ता अभी भी दोनों ने एक दूसरे की तस्वीर नहीं देखी है मगर अब ग्रुप में उस लड़के के कुछ ख़ास शेर और गानों की पंक्तियाँ उन तीन डॉट्स के साथ ही पूरी होती हैं और लड़की भी अपनी कविता के अंत में तीन डॉट्स लगाना नहीं भूलती !

वाट्स एप के तमाम इमोटीकोन्स के बीच ग्रुप में वे तीन डॉट्स ऐसे झिलमिलाते हैं मानो किसी ने तीन सूरजमुखी के फूल खिला दिए हों !
हाँ .. मुहब्बत का इज़हार करने को तीन ही शब्द काफी होते हैं ना ?

और शब्द न हों तो तीन डॉट्स... ! 

21 comments:

Unknown said...

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Jyoti Dehliwal said...

सुंदर प्रस्तुति।

Manyu Aatreya said...

aap bahut acchha likhti hain ...

रवि रतलामी said...

आपकी पहली किताब - व्यंग्य संग्रह के लिए बहुत-2 बधाई व शुभकामनाएँ.

Unknown said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

पल्लवी जी आपकी ये रचना पढ़ते-पढ़ते एक भाव में बह सा गया आपने पुराने ज़माने जिस प्रकार से लोग अपना प्यार एक खत में संजोते थे आज उसका रूप व्हट्सप्प ने ले लिया है आपकी ये रचना बहुत ही अच्छी है आप इसी प्रकार की रचनाओं को शब्दनगरी पर भी लिखकर और भी पाठको तक पंहुचा सकती हैं .....

Kavita Rawat said...

बहुत खूब!

RAJESH PANDEY said...

मिठास लिए हुए dots

RAJESH PANDEY said...

मिठास लिए हुए dots

मुकेश कुमार सिन्हा said...

डॉट्स भी खुबसूरत हो सकते हैं.........

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

तीन डॉट वाला व्हाट्सएपिया रोमांस खूबसूरती से गढ़ा है . :) ...

Meetu Mathur Badhwar said...

once again a cute post!

Hi Pallavi ji,

Meetu Mathur Badhwar this side. If you remember we met at Kush's stall in book fair. I had come with my husband Neeraj. I am a big fan of your writing.

Please mail me your phone no. at meetusmathur@gmail.com.

Love

bhavana pandey said...

Bahut khoob.....facebookiya and whatsapiya

bhavana pandey said...

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Shekhar Suman said...

नयी पोस्ट इधर कू चाहिए, फेसबुक पर नहीं...

Author And Admin said...

https://hindialfaz.blogspot.in/
नया blog हैं कोशिश की है कृपया आप सभी अपना योगदान करें 🙏

Anu Shukla said...

बेहतरीन
बहुत खूब!

HindiPanda

sid khan said...

thank for share with us
sharing is caring

PKMKB

AjayKM said...

lifestyle matters
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अजय कुमार झा said...

हिंदी ब्लॉग जगत को ,आपके ब्लॉग को और आपके पाठकों को आपकी नई पोस्ट की प्रतीक्षा है | आइये न लौट के फिर से कभी ,जब मन करे जब समय मिलते जितना मन करे जितना ही समय मिले | आपके पुराने साथी और नए नए दोस्त भी बड़े मन से बड़ी आस से इंतज़ार कर रहे हैं |

माना की फेसबुक ,व्हाट्सप की दुनिया बहुत तेज़ और बहुत बड़ी हो गयी है तो क्या घर के एक कमरे में जाना बंद तो नहीं कर देंगे न |

मुझे पता है आपने हमने बहुत बार ये कोशिस की है बार बार की है , तो जब बाक़ी सब कुछ नहीं छोड़ सकते तो फिर अपने इस अंतर्जालीय डायरी के पन्ने इतने सालों तक न पलटें ,ऐसा होता है क्या ,ऐसा होना चाहिए क्या |

पोस्ट लिख नहीं सकते तो पढ़िए न ,लम्बी न सही एक फोटो ही सही फोटो न सही एक टिप्पणी ही सही | अपने लिए ,अंतरजाल पर हिंदी के लिए ,हमारे लिए ब्लॉगिंग के लिए ,लौटिए लौटिए कृपया करके लौट आइये

Gautam said...

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