Thursday, September 18, 2008

" अतिथि देवो भव"

जाने किस जमाने में रची गयी होगी ये लाइन " अतिथि देवो भव" ! वैसे जिस भी ज़माने में रची गयी हो , एक बात तो तय है की उस वक्त अतिथि बड़े बढ़िया टाइप के होते रहे होंगे!बढ़िया माने ऐसा काम करने वाले जिससे मेजबान ऐसी कहावत बनाने को मजबूर हो जाए!वैसे बचपन में भी हमें वो मेहमान सदा प्रिय रहे जो आते समय चॉकलेट लाते थे और जाते समय मम्मी के न न करने पर भी दो-पांच रुपये हाथ में ठूंस जाते थे!
ऐसे देवता स्वरुप अतिथियों के आने पर मम्मी की डांट से भी मुक्ति मिलती थी!लिहाज के मारे मम्मी आँखें तरेर कर रह जाती थीं....और आँखें तरेरने से डट जाएँ ऐसे प्यारे और मासूम बच्चे हम कभी रहे नहीं!मम्मी के लिए वो कभी देवता रहे हों या नहीं हमारे लिए तो थे!

ये तो हुई हमारी कथा की भूमिका....भूमिका अगर अच्छी हो तो लगता है कि आगे भी कथा अच्छी होगी! अक्सर हम अपने दुःख की शुरुआत इसी तरह सुखभरे वाक्यों से करते हैं,
...हमें वो मेहमान सदा प्रिय रहे जो आते समय चॉकलेट लाते थे और जाते समय मम्मी के न न करने पर भी दो-पांच रुपये हाथ में ठूंस जाते थे!...

जिससे किसी को ऐसा न लगे की लो खोल ली अपने दुखों की गठरी!तो भैया...अब न वो बचपन रहा और न वैसे देवता स्वरुप अतिथि! शायद मेहमानों से बचपन में स्नेह होने के कारण भगवान ने हमें मेहमान नवाजी का भी बहुत मौका दिया है!हमारा घर मेहमानों का आदी है!हर प्रकार के मेहमान घर में निस्संकोच आते हैं!इन्ही में से दो मेहमानों को ख़ास चुनकर आपके सामने आज पेश कर रहे हैं....इस आशा के साथ कि उनकी इस पोस्ट पर नज़र ने पड़े!वैसे सावधानी बतौर हमने नाम उनके बदल दिए हैं!

अभी पिछले दिनों बेबी हमारे घर पधारी! ये 25 वर्ष की बालिका थीं....जो कोई इंटरव्यू देने भोपाल आयीं थीं! और इसमें ख़ास बात ये थी कि हमने इसके पहले इन्हें कभी नहीं देखा था! लेकिन परीक्षा देने वाले और इंटरव्यू देने वाले बच्चों के लिए हमारे मन में विशेष सुहानुभूति रहती है इसलिए हमने सहर्ष बेबी जी को अपने घर ठहराया! छोटी बहन का कमरा इनके लिए खाली कराया ...सोचा कि पहली बार आई है तो शायद संकोच की वजह से तकल्लुफ करेगी इसलिए विशेष रूप से ध्यान रखा की कोई कमी न रह जाए! पर नहीं साहब....तकल्लुफ क्या होता है , बेबी इससे नितांत अपरिचित थीं! अगले दो दिनों में हमें महसूस होने लगा कि वो मेज़बान है और हम मेहमान! हमारे अर्दली ने कभी हमारी डांट नहीं खायी थी मगर खाना बनने में दस मिनिट की देरी होने पर बेचारा अदबसिंह बेबी की ऐसी डांट खाया कि बेचारा रुआंसा हो गया! हम भी अकबकाये से रह गए!

घर के हर कुर्सी मेज़ पर बेबी के सलवार कुरते सुशोभित होने लगे! एक बार दबी जुबान में कहने की जुर्रत भी की कि अगर इन्हें घडी करके एक स्थान पर रख दिया जाए तो कैसा रहे? बेबी जी जवाब में मुस्कुरा दीं....जिसका अर्थ हम कभी नहीं समझ पाए! लेकिन चूंकि उनके कपडे कुर्सी टेबल से नहीं हटे इससे ये ज़रूर समझ गए आगे से ऐसे बेतुके आग्रह मेहमानों से नहीं करना है ! उनके स्नान करने के बाद बाथरूम की स्थिति सुलभ शौचालय सरीखी हो जाती थी! हमें कभी समझ नहीं आया कि इतना कीचड और मिटटी बाथरूम में किस प्रकार से आ जाता था!और तो और दीवार पर भी कीचड के निशान....मानो उछल उछल कर नहाती हो! उसके इंटरव्यू देने जाने के बाद हम अपनी बहन के साथ उसकी खूब बुराई करते! इससे गुस्सा थोडा कम हो जाता था!

टी.वी. देखते वक्त मजाल है कि रिमोट उनके हाथ की पकड़ से ढीला हो जाए! दो दिन हमने सहारा वन के प्रोग्रामों की टी.आर.पी. बढाई! एक बार टी.वी. देखते वक्त वो बोलीं...दीदी मैं अभी पानी पीकर आती हूँ! हम खुश हो गए ...चलो, इतनी देर में तो रिमोट अपने कब्जे में ले लेंगे मगर वे हमारे अरमानों पर पानी फेरते हुए बन्दर के बच्चे की तरह रिमोट को अपने से चिपकाए हुए ही चली गयीं!

दो दिन बाद इन्हें जाना था...इस बीच एक दिन हमें आदेश सुनाया गया कि ऑफिस पहुँचने के बाद हम अपनी गाडी भेज दें ताकि ये भोपाल दर्शन को जा सकें!यहाँ हमारी जीत हुई, हमने सफाई से बहाना बना दिया कि हमें ज़रूरी काम से कहीं जाना है इसलिए गाडी फ्री नहीं कर पायेंगे!लेकिन इतनी जल्दी प्रसन्न नहीं होना चाहिए...शाम को हमारे घर लौटते ही बड़ी चतुराई से हमसे पूछा गया " चलिए दीदी...हमें घुमा लाइए" हम तो खार खाए बैठे थे! हमने भी मधुर स्वर में कहा " नहीं यार में तो थक गयी हूँ! नहीं मन कर रहा है!" " ठीक है ..तो आप आराम करो, मैं ही जाकर घूम आती हूँ! आप थकी हो तो वैसे भी कहीं नहीं जोगी! अब तो गाडी फ्री है ही!" बेबी ने नहले पर देहला मारा! हमने एक मरी सी मुस्कराहट के साथ सर हिला दिया! अगले दिन मेहमान को जाना था...मेहमान ने कहा कि वैसे तो रात को ही जाना चाहती हूँ पर शायद रात की गाडी में रिज़र्वेशन न मिले इसलिए कल सुबह चली जाउंगी" हमने घबरा कर कहा " नहीं नहीं...तुम चिंता मत करो! रिज़र्वेशन हम करा देंगे! बल्कि अभी कराये देते हैं!" और उनके जवाब की प्रतीक्षा किये बिना हमने रात की गाडी में रिज़र्वेशन और कोटा लगाने के लिए थाने में फोन कर दिया!

इस प्रकार रात को ही हमने अतिथि देवता को रवाना कर दिया...इस प्रार्थना के साथ कि ईश्वर उनका अगला साक्षात्कार भोपाल नगरी में न करवाए! बड़े डरते डरते ये पोस्ट लिखी है....कहीं बेबी ने पढ़ ली तो बड़ी हेठी हो जायेगी! सोच रहे हैं कि अब दुसरे मेहमान के बारे अभी न ही लिखें तो अच्छा क्योंकि उनको गए हुए अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ है....थोडा उनकी स्मृति भी क्षीण हो जाए तब लिखने में कोई हानि नहीं है!आप क्या कहते हैं...?

38 comments:

आलोक सिंह "साहिल" said...

Pallavi ji,
bahut hi umda lekh.aise hi apni smritiyon ko bantate rahen
ALOK SINGH "SAHIL"

बेबी said...

अच्छा दीदी.. उस दिन जो बेबी बेबी बोल रही थी आप.. वो सब नाटक था??

खैर कोई बात नही अगले शनिवार को फिर हमारा इंटरव्यू है भोपाल में.. फिर देखती हूँ आपको.. पूरे सात दिन नही रुकी तो मेरा नाम भी बेबी नही..

फ़िरदौस ख़ान said...

बहुत ही उम्दा तहरीर है...

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

अरे बाप रे ये बेबी तो यहा भी आ गयी... हमारी शुभकामनाए स्वीकार कीजिए..

बहुत ही शानदार पोस्ट.. बरबस ही मुस्कुराहट ले आई गालो पर..

मीत said...

आपके अहसास की उम्दा रचना...
लेकिन हम तो यही कहेंगे की
अतिथि देवो भवो:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बेबी है तो क्या हुआ ..इतने अपने पन से रही है वो आपके पास ...अतिथि तो ईश्वर का रूप है :) बहुत बढ़िया लिखा है आपने .

जितेन्द़ भगत said...

मजा आ गया पढ़कर। आप वि‍परि‍त परि‍स्‍ि‍थति‍यों को इ‍तनी सहज होकर अपने अहसास से जोड़कर प्रस्‍तुत करती हैं कि‍ मन रम जाता है।

रश्मि प्रभा said...

bahut sundar,mast prastutikaran

Gyandutt Pandey said...

वज्राघाती बेबी!

Rohit Tripathi said...

Pallavi ji.. jin Bebi ne yaha comment kiya hai kya wahi bebi hai jinke barein mein aapne yeh post likha? agar wahi hai to aapki to lag gayi :-)

Rohit Tripathi

Parul said...

rubba khair:)

Shiv Kumar Mishra said...

अतिथि बेबी भव....:-)

पल्लवी जी, ये आपकी अतिथि बेबी ने उसके बारे में लिखी पोस्ट पढ़ ली...टिप्पणी भी कर दिया. मजे की बात ये कि इन्हें ब्लॉग जगत शायद जम गया है. आज मेरी पोस्ट पर भी टिप्पणी करके गई हैं..

मेरे लिए तो बेबी सचमुच देव (या फिर देवी) ही साबित हुई...टिप्पणी जो दे गईं.

रंजन said...

कोई नहीं.. बोलो एक बार फिर " अतिथि देवो भव"

शोभा said...

हास्य विनोद का सुन्दर संगम । वाह

नीरज गोस्वामी said...

बेबी जी तो चली गयीं...अब आप खम्बा नोचना बंद करें और दस दिन की छुट्टी लेकर उनके यहाँ मेहमान बन कर चली जायें...जब तक जैसे को तैसा वाला सबक नहीं सिखाएंगी तब तक बेबी जी के कानो पर जूँ नहीं रेंगेगी...
नीरज

Udan Tashtari said...

बेबी कहाँ से आई थी-एक दो शहरों में उछल उछल के नहाने की प्रथा है..:)

बेहतरीन!! तुम्हारी मेहमान नवाजी तो अच्छी होगी मगर मेहमान के जाने बाद-कच्चा चिट्ठा..आने की सोच कर भी दिल दहल जाता है. क्या पता लिख दो कि ऐसा खाये जैसे जीवन में पहली बार खा रहे हों!! :)

डॉ .अनुराग said...

हाय बेबी .......कित्ती प्यारी है .....आप बेवजह गाली दे रही है...बच्ची है इंटरव्यू के टेंशन में होगी इसलिए डांट दिया होगा अर्दली को......भगवान् भला करे उसका ...उसे घुमा देते तो क्या बुरा होता आपका ....

-.सौजन्य से सहारा परिवार

दिनेशराय द्विवेदी said...

सच्ची अतिथि थी बेबी। न आने की न जाने की तिथि।

अभिषेक ओझा said...

पहले तो ये साफ़ हो गया की कभी आपसे मिलना हो तो बिना चोकलेट के नहीं !

और एक सवाल:
"उसके इंटरव्यू देने जाने के बाद हम अपनी बहन के साथ उसकी खूब बुराई करते!" क्या इंटरव्यू देने का पूरा पैकेज था? मेरा मतलब है एक से ज्यादा इंटरव्यू थे क्या?

बेबी के बारे में और बताइए, मुझे तो रोचक लड़की लग रही है :-)

दीपक said...

मजेदार लगी आपकी कलम !!

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत शानदार लेखन ! पर पीछे से कच्चा चिठ्ठा ? :)
राम राम !

अनूप शुक्ल said...

बेबी ने आपकी लेखन कला को और चमका दिया। उसे बुलाकर एक बार फ़िर मेहमान नवाजी करिये उसकी।

ashok priyaranjan said...

Pallavi ji,
hamare yehan ek kahavat hai-ek din ka mehman, dusrey din beiman aur teesrey din saitaan.- aapkey mehman ney pahley din hi teesrey din ki istithi la dee to aab lagata hai ki aadhunik sandarbhon mein kahavat ko badalna hoga.
kabhi fursat ho to merre blog per bhi aayein.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

Te Baby jee ka jawab nahee ;-)
aur aapka aalekh bhee rochak hai !

रंजन राजन said...

एेसी िकतनी बेिबयों का कच्चा िचट्ठा खोलेंगी?
अितिथ देवो भव........

अशोक पाण्डेय said...

उत्‍कृष्‍ट हास्‍य-व्‍यंग्‍यलेखन। मजा आ गया। ईश्‍वर बेबी जैसा अतिथि सारे ब्‍लॉगरों के यहां भेजें, ताकि सभी ऐसा ही शानदार व्‍यंग्‍य लिखें :)

Nitish Raj said...

जिसका कच्चा चिट्ठा खोला वो तो दूसरे पल ही उसने पढ़ लिया अब तैयारी रखिए अगले इंटरव्यू के समय की जब वो ७ दिन रुकेंगी। फिर आप तीन पोस्ट कर सकेंगी अलग अलग तरह से।

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

बेबी जैसी मेहमान से भगवान बचाए. कही बेबी जी ने पोस्ट के साथ टिप्पणी पढ़ ली तो भाई अपनी भी खैर नही .
मेहमाननवाजी कभी कभी अखरने लगती है यह सच है. धन्यवाद्.

राज भाटिय़ा said...

अजी यह बेबी तो बहुत काम की हे, आप खम्खा बेबी से खार काये बेठी हे,जिस से भी बदला लेन हो बेबी को दस बारह दिन के लिये उन के घर भेज दो.... लेकिन मेरा पता मत दे देना.वेसे नाम से तो मासुम लगती हे आप की यह बेबी.
धन्यवाद

Manish Kumar said...

भगवान बचाए ऐसे मेहमानों से...

रजनी भार्गव said...

लगता है आपकी बहुत अपनी हैं, देखिये न दुबारा आ रही हैं। अच्छा लिखा है।

vijaymaudgill said...

क्या बात है। सच कहूं तो आपका लेख पढ़ने के बाद और सभी के कमैंट पढ़ने तक और अपना कमैंट देने तक हंस रहा हूं। बाकी आप समझ जाइए... हा हा हा

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

अरे भई, ऐसे मेहमानों पर आपका ही अधिकार थोडे है।
चलिए इसी बहाने आप मेहमानों के बारे में एक नया व्‍यू जानने के मिला।

UjjawalTrivedi said...

बहुत खूब पल्लवी जी, आपके लेखन को देखकर यकीन करना मुश्किल है कि आप पुलिस महकमे में है- मेरा उत्साह बढाने का शुक्रिया-
http://ujjawaltrivedi-poetry.blogspot.com
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रौशन said...

भगवान् भला करे बेबी जी का जिन्होंने आपको इतनी अच्छी थीम दे दी . हम तो सोच सोच कर खुश हुए जा रहे हैं की अगली बार जब बेबी जी आएँगी तो आप क्या लिखेंगी. भगवान् आपको ढेर सारी बेबियों से नवाजे और आप ऐसे ही लिखतीं जायें. हम पाठक जरा स्वार्थी किस्म के होते हैं.
वैसे एक बात और दिख रही है यहाँ कई साथियों की कल्पनाओं को आपकी बेबी नामक अतिथि रूपी देवी ने उड़ान दे दी है

Tarun said...

25 वर्ष की बालिका
ye lagi sabse best line,

baaki to kaha hi hai na atithi devo bhavo to ye sab to karna hi parega tabhi to devo bhavo sarthak hoga

ललितमोहन त्रिवेदी said...

pin point observation.well done.

Fahmida Laboni Shorna said...

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