Saturday, April 12, 2014

पप्पू और सौ का नोट



बड़े दिन हुए ..पप्पू कहीं शॉपिंग के लिए नहीं निकले थे ! आज सुबह से ही पप्पू सोचकर बैठे थे कि आज तो चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए मगर जम के शॉपिंग कर डालनी है बस ! ऐसा सुन्दर विचार आने पर पप्पू से फिर रुका न गया ! सुबह नौ बजे ही तैयार होकर जेब में सौ का नोट डालकर निकल पड़े बाज़ार की ओर ! " भले ही किसी पार्क में या नुक्कड़ की पान की दुकान पर या मॉल के सामने सीढ़ियों पर बैठकर दुकानें खुलने का इंतज़ार कर लूंगा पर एक क्षण भी घर में ठहरना अब पाप है !"

जितने खुश पप्पू थे , उससे कम से कम सौ गुना खुश वो सौ का नोट था जो इस वक्त पप्पू की दाहिनी जेब में अपनी रिहाई के पल के इंतज़ार में दिल की धड़कन बढाए बैठा था ! बेचारा नोट पिछले तीन महीनों से जेब में कैद कसमसा रहा था ! एक यायावर को कैद कर देना कितना बड़ा गुनाह है , ये बात उसने कई बार पप्पू को अपने तरीके से समझानी चाही थी ! कभी पूरा ज़ोर लगाकर जेब में फड़फड़ा उठता , कभी यत्न कर कील पर टंगे पैंट से उछाल कर गिर पड़ता , कभी नोक जैसी बनाकर पप्पू को खुजली करता , मगर पप्पू तो पप्पू ही हैं ,नोट को गुडी मुड़ी करके फिर जेब में ठूंस देते !! लिहाज़ा नोट बेचारा बिना अपराध के कैद काट रहा था ! आज पप्पू का शॉपिंग का विचार जानकार नोट अपनी आज़ादी के ख्वाब संजोने लगा था , दुनिया देखने की चाह बेतरह जाग उठी थी !

तो पप्पू चल पड़े बाज़ार की ओर ! कपडे की दुकान ( लिवाइस )का शटर खुलते ही दुकानदार से भी पहले पप्पू छलांग मारकर दुकान में घुस गए ! दुकानदार ने ऐसा आतुर ग्राहक पहले कभी न देखा था ! पप्पू की डिमांड पर एक से बढ़कर एक मंहगे और लेटेस्ट फैशन के कपडे दिखाए जाने लगे ! पप्पू ने सारे कपडे एक एक करके ट्राय मारे .. हर ड्रेस में अपना एक सेल्फी खैंचा! फिर दस जोड़ कपडे पसंद कर लिए !दूकान दार का चेहरा दमक गया .. ऐसी भैरंट शुरुआत तो कभी न हुई थी इस दूकान के इतिहास में ! दुकानदार ने पप्पू के न न करते भी रियल का मिक्स फ्रूट जूस पप्पू को पिलाया !अठारह हज़ार का बिल आया , पप्पू ने अपनी बाई जेब से ए टी एम निकाला और दुकानदार को थमा दिया ! दुकानदार ने कार्ड इन्सर्ट किया , पप्पू ने पासवर्ड डाला , मगर जाने क्या टेक्नीकल समस्या आयी कि पेमेंट न हो सका ! दुकानदार झल्ला उठा और पप्पू से कैश देने को कहा , मगर कौन इतना कैश लेकर चलता है भला ! पप्पू भी खीजे , बैंक को दो चार कर्री गालियां बकीं ,फिर पैक कपडे अलग रखवा कर दूसरा ए टी एम लाने को कह चलते बने !

सौ का नोट को एक एक पल काटना मुश्किल पड़ रहा था , उसने मनाया कि अब पप्पू किसी छोटी दुकान में घुसकर रूमाल , मोज़े टाइप की कोई वस्तु खरीद ले ! मगर पप्पू ने अब वुडलैंड का रुख किया ! मंहगे से मंहगे जूते निकलवाये , ट्राय किये , सेल्फी खैंचे! यहाँ तेरह हज़ार का बिल आया मगर ए टी एम फिर दगा दे गया ! पप्पू हताश बाहर निकल आये !
सौ का नोट आंसू बहाता रहा ..पप्पू मुस्कुराते दुकान दर दुकान परिक्रमा लगाते रहे !

आखिर शाम तक पप्पू ने जूते , कपडे , तरह तरह की हैट , मफलर और मोबाइल के साथ अपने करीब दो सौ सेल्फी खैंच लिए ! आखिरी दुकान से बाहर निकलते वक्त पप्पू ने खुद को आँख मारी , ए टी एम को चूमा और अपनी सफलता पर खुद की पीठ थपथपायी !
अब पप्पू के पास फेसबुक के प्रोफाइल पिक का एक साल का कोटा हो चुका था ! पप्पू गाते मुस्कुराते घर की तरफ लौट रहे हैं !

सौ के नोट की आशाओं पर घड़ों पानी फिरने लगा , सौ का नोट जार जार रो पड़ा ! जब घर के नज़दीक पहुँचने को हुआ तब सौ के नोट ने एक बार पूरी शक्ति बटोरकर जेब में दौंदापेली मचाना शुरू किया ! ऐसा खलबलाया कि पप्पू को उसे निकाल कर हाथ में लेना पड़ा ! फिर जो हुआ वो इस सदी का सबसे बड़ा चमत्कार था !
नोट बोल पड़ा ..
नोट ने सुबकते हुए कहा " बाउजी मैं दुनिया देखना चाहता हूँ !"
पप्पू ने भीगे हुए नोट को देखा , उसे गांधी जी की तस्वीर की जगह डी डी एल जे की काजोल दिखाई पड़ी !
पप्पू ने नोट को ऊंचा उठाकर कहा " जा ..जी ले अपनी ज़िंदगी "
और सामने पान की दुकान से राजश्री गुटके का एक पाउच खरीदा ! दुकानदार को सौ का नोट दिया , नोट स्वयं ही कूदकर दुकानदार की ड्राअर में सबसे नीचे दुबक कर बैठ गया ताकि पप्पू की मनहूस शकल का एक पिम्पल तक ना दिखाई दे !
इस प्रकार पप्पू का दिन सुखपूर्वक ख़तम होता है !
नोट और पप्पू दोनों शाम को अपनी गति को प्राप्त हुए ! दोनों की इच्छाएं पूर्ण हुईं !


पप्पू ने अभी नया प्रोफाइल पिक अपलोड किया ... आपने देखा ?

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3 comments:

सागर said...

शुक्रिया।
लेकिन और चाहिये।

Darshan Singh said...
This comment has been removed by the author.
Darshan Singh said...

कलाईमेक्स में और भी मज़ा आ जाता जब पानवाला पप्पू को सौ का नोट वापस करते हुए कहता - बेटा मेरे पास छुट्टा नहीं है. फिर कभी पैसे दे जाना. तब सौ रुपये की सूरत औरभी देखने लायक होती !