Monday, March 17, 2008

जब भूख की ज्वाला जलती है
ईमान भस्म हो जाता है
भूख दफन हो या न हो
इंसान दफन हो जाता है

भरा पेट हो तो भविष्य के
सपने कई जगाता है
एक सूखी रोटी की टुकडा
बच्चों को चोर बनाता है

जाने कितनों के हाथों में
भूखे मरने की रेखा है
शाइनिंग इंडिया में हमने
भूखों को बिलखते देखा है

सोचो उस माँ के बारे मे
जिसके बच्चे कंकाल से हैं
बेबस बाप की आँखों में
कुछ जलते हुए सवाल से हैं

इन बेईमान रईसों के
बाल न बांका होता है
जब भी कोई जुर्म हो तो
शक भूखों पर ही होता है

जिसका पेट भरा हो तो
दिल खाली हो जाता है
भूखा तो अपनी रोटी भी
मिल बाँट कर खाता है

जब भूख की ज्वाला जलती है
ईमान भस्म हो जाता है...

1 comments:

avnish said...

Now maturity is coming. Keep it up.