Thursday, March 27, 2008

शुक्रिया मेरे ख्वाबो

शब की नर्म गोद में
पलकों के महफूज़ साए में
सोये हुए कुछ नन्हें ख्वाब
लेते हैं एक अंगडाई और
फैलाकर अपनी बाहें
ले लेते हैं मुझे अपने आगोश में
रात भर थपकी देते हैं
अपनी नन्ही हथेलियों से
बुनते हैं रेशमी ख्यालों के धागे

दिन भर की उलझनों से थकी मैं
खो जाती हूँ इन ख्यालों में
और जीती हूँ
कुछ बेहद रूमानी लम्हे
कुछ अनकही ख्वाहिशें
कुछ भीगी भीगी यादें
कुछ खुशबू में लिपटे एहसास

पता नहीं कब ,थककर
ये ख्वाब भी अलसाने लगते हैं
और धीरे से सो जाते हैं
एक के ऊपर एक गिरकर

तब,सुबह की पहली ओस के साथ
मैं जागती हूँ और
मीठी सी खुमार भरी आवाज़ में
कहती हूँ...
शुक्रिया मेरे ख्वाबो
हकीकत हर दिन मुझे क़त्ल करती है
और तुम....
हर शब मुझे जिंदा कर देते हो..

2 comments:

डॉ.ब्रजेश शर्मा said...

excellent expression of honest feelimgs.
This is poetry.
Badhaiyaan !

Brijesh Sharma

Lalit Mohan said...

palakon par jhilmilate swapna aur
yatharth ka khoobsoorat aaina hai-kuch ehsaas.bahut achchha,achchhi tarah se likh rahi ho.kahin kahin Dharmveer Bharti ki 'Kanupriya'yaad aati hai..BADHAI.
L.M.TRIVEDI(MAMAJI)